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सितमगर

एक कविता लिख लेता हूँ , पता नहीं क्या कर लेता हूँ ....

उन्हें देखने को केवल हम ही रह जाते!!

फ़िक्रे गम!

kyun yaad aati hai.....

सावन

गिरगिटी दुनिया

तेरे वादे

मुझमे समाने की कोशिश हो जैसे

उड़ने पे पहरेदारी है

ओश के चादर तले

राख बन गई है मुहब्बत

ये तवायफ सोच तेरी